Vishwakarma Puja on 16 September 2020
Vishwakarma Baba

Belief of Vishwakarma Puja – विश्वकर्मा पूजा की धारणा

Updated on July 6, 2020

If we observe our ancient texts, Upanishad and Puran, etc., we will find that Lord Vishwakarma has been not only worshiped and adored by humans but also by the gods because of their specific creative knowledge and science.

There are different pieces of evidence of the origin of Lord Vishwakarma. According to some religious texts, the name of Brahma’s son was Dharma, whose wife’s name was Vastu. The seventh son of Dharma and Vastu was Vaastu, who was the original promoter of Shilpashastra. Lord Vishwakarma was born to the same Vaastu’s wife named Angirasi.

At the same time, according to Skanda Purana Prabhas, the eighth son of the sage Dharma, was married to Bhuvana Brahmavadini, sister of the Guru Brihaspati. The son born to Prabhas and Bhuvana was Lord Vishwakarma. It is also clearly mentioned in Mahabharata Adiparva chapter 16, verses 27 and 28.

Apart from this, according to the Varaha Purana, Lord Brahma created Vishwakarma on earth with his intellect.

It is believed that Lord Vishwakarma has built the houses of all the gods and their daily use items. Pushpak Viman, Karna’s coil, Lord Vishnu‘s Sudarshan Chakra, Lord Shiva’s trident, and Yamraj’s Kandaldan, etc. are also made by Lord Vishwakarma.

Our scriptures and ancient texts describe the five forms and incarnations of Vishvakarma. Virat Vishwakarma, Dharmavanshi Vishwakarma, Angiravanshi Vishwakarma, Sudhanva Vishwakarma, and Bhranguvanshi Vishwakarma. Manu Rishi was the eldest son of Lord Vishwakarma. He was married to Kanchana, daughter of Angira Rishi. He has created humans.

All these beliefs regarding Vishwakarma Puja made this Puja very important in North India. Since then, Lord Vishwakarma worshiped by artisans, mechanics, welders, drafters, engineers, and other skilled workers for flourishing in their business.

__

विश्वकर्मा पूजा की धारणा

यदि हम अपने प्राचीन ग्रंथों, उपनिषद और पुराण, आदि का अवलोकन करें, तो हम पाएंगे कि भगवान विश्वकर्मा को केवल उनके विशिष्ट रचनात्मक ज्ञान और विज्ञान के कारण मनुष्यों द्वारा ही नहीं, बल्कि देवताओं द्वारा भी पूजा जाता है।

भगवान् विश्वकर्मा की उत्पत्ति के अलग अलग प्रमाण मिलते हैं। कुछ ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्मा के पुत्र का नाम धर्म था जिनकी पत्नी का नाम वस्तु था। धर्म और वस्तु के सातवें पुत्र का नाम वास्तु था, जो शिल्पशास्त्र के आदि प्रवर्तक थे। उन्हीं वास्तुदेव की अंगिरसी नामक पत्नी से उत्पन्न हुए थे भगवान विश्वकर्मा। वहीं, स्कंद पुराण के अनुसार धर्म ऋषि के आठवें पुत्र प्रभास का विवाह देव गुरु बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मवादिनी से हुआ था। प्रभास और भुवना से उत्पन्न होने वाले पुत्र थे भगवान विश्वकर्मा। आपको बता दें कि महाभारत आदिपर्व अध्याय 16 श्लोक 27 एवं 28 में भी इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म भुवना ब्रह्मवादिनी की कोख से ही हुआ था। इसके अलावा वराह पुराण के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने ही अपनी बुद्धि से विश्वकर्मा को पृथ्वी पर उत्पन्न किया था।

मान्यतानुसार भगवान् विश्वकर्मा ने ही सभी देवताओं के घरों और उनके दैनिक उपयोग वाली चीजों का निर्माण किया है। पुष्पक विमान, कर्ण का कुंडल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और यमराज का कंदलदान आदि भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाए हैं।

हमारे शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों में विश्वकर्मा के पांच रूपों और अवतारों का वर्णन है। विराट विश्वकर्मा, धर्मवंशी विश्वकर्मा, अंगिरावंशी विश्वकर्मा, सुधन्वा विश्वकर्मा और भृगुवंशी विश्वकर्मा। भगवान विश्वकर्मा के सबसे बड़े पुत्र मनु ऋषि थे। उनका विवाह अंगिरा ऋषि की बेटी कंचना से हुआ था। उन्होंने ही मानव सृष्टि का निर्माण किया है।

विश्वकर्मा पूजा को लेकर इन सभी मान्यताओं ने उत्तर भारत में इस पूजा को बहुत महत्वपूर्ण बना दिया। तब से, अपने व्यवसाय में फलने-फूलने के लिए कारीगरों, यांत्रिकी, वेल्डर, ड्राफ्टर्स, इंजीनियरों और अन्य कुशल श्रमिकों द्वारा भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना की जाती है।

Copyright © Vishwakarma Puja 2018-2020. All Right Reserved.

In association with www.festivalpuja.com.