Vishwakarma Puja on 16 September 2020
Vishwakarma Baba

Procedure of Vishwakarma Puja (Mantra) – विश्वकर्मा पूजा की प्रक्रिया

Updated on July 6, 2020

Pooja and Yagya of Lord Vishwakarma are done in a special procedure. First of all, Draw an Asta Dal Kamal as Alpana. After that, place the Chauki and Cover it with a cloth. Now, spread Ganga Jal for Sudhikaran and Place the Idol on Chauki.

Draw Narayan Mark on the Kalash and fill it with Holy Ganga water. Now, Place the Kalash on Ganga Soil. After that, Put Rice, Haldi, Betel Nut, Mango Leaves on the Kalash.

Take a Raw Coconut and Put Upanayana on it. Now Put Cloth on the Coconut and Place Chand mala on the Coconut. After this, meditate on Lord Vishwakarma.

Now, offer flowers to Lord Vishwakarma and say following mantra,

ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:, ॐ अनन्तम नम:, ॐ पृथिव्यै नम:, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए.

After that, take flowers in hand, read the mantra, and spell it all around. Tie the ‘Rakshasutr’ on your and your wife’s hand. Now leave the flower in the water utensil. After this, offer Sindoor, Chandan, Rice, and Flowers to the Tools or machines. Lit up dhups, take flowers and supari with water in your hand, and make a resolution.

Now, Offer flowers as puspanjali and chant ‘Om Vishwakarmae Namah’ 3 times in a row. After worshiping various types of tools and instruments etc, perform the Hawan Yagya. At last, Do the Aarti and Offer the dhakshina to the Priest.

It is believed that there is no shortage of wealth and happiness and prosperity in the person who performs Vishwakarma worship. The glory of this worship increases with the business of the person and all the desires are fulfilled.

The statue of Lord Vishwakarma must be kept overnight alongside the items that were used in the puja. After a day, simply throw these into a water body. One individual must be available in the factory or shop at night to ensure that the Akhand Diya before the Vishwakarma Idol is ON for the whole night. Visarjan is done on the very next morning in a nearby water body or river.

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विश्वकर्मा पूजा की प्रक्रिया

भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना और यज्ञ एक विशेष तरीके से की जाती है। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ़ करके वहां एक चौकी रखें। चौकी को एक नये कपड़े से ठककर उसके ऊपर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति रखें।

अब कलश की स्थापना गंगा की साफ़ मिट्टियों पर करें, कलश पर नारायण का निशान बनाएं और कलश को पवित्र गंगा जल से भरें। अब, कलश के अंदर चावल, हल्दी, सुपारी और आम की पत्तियां डालें।

एक कच्चा नारियल लें और उस पर उपनयन लगाएं। अब नारियल पर कपड़ा रखकर चांद माला रखें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।

अब, भगवान विश्वकर्मा को फूल चढ़ाएं और मंत्र बोलें,

ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:, ॐ अनन्तम नम:, ॐ पृथिव्यै नम:, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए

अब हाथ में फूल लेकर मंत्र पढ़े और चारों तरफ मंत्र बोलें। अपनी और अपनी पत्नी के हाथ पर ‘रक्षासूत्र’ बांधें। अब फूल को पानी के बर्तन में छोड़ दें। इसके बाद, सिंदूर, चंदन, चावल, और फूल भगवान विश्वकर्मा की मूर्तियों पर चढ़ाएं। इसके बाद, धूप और अगरबत्ती जलाने के बाद फूल, सुपारी और पानी को हाथ में लेकर संकल्प करें।

उपरोक्त सभी प्रक्रियाओं को करने के पश्चात्, पुष्पांजलि के रूप में पुष्प चढ़ाएं और ‘ओम विश्वकर्माए नमः’ का लगातार 3 बार जाप करें। विभिन्न प्रकार के औजारों और उपकरणों आदि की पूजा करने के बाद, हवन यज्ञ करें। अंत में आरती करें और पुजारी को दक्षिणा चढ़ाएं।

ऐसा माना जाता है कि विश्वकर्मा पूजा करने वाले व्यक्ति के पास धन, सुख और समृद्धि की कोई कमी नहीं होती है। इस पूजा की महिमा व्यक्ति के व्यवसाय के साथ बढ़ती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के साथ-साथ भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति को रात भर अखंड दीपक के साथ रखा जाना चाहिए। सुनिश्चित करने के लिए एक व्यक्ति को रात में कारखाने या दुकान में उपलब्ध होना चाहिए। अगली सुबह कलश समेत सभी चीजों को निकटवर्ती जल निकाय या नदी में विसर्जित करें।

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