Vishwakarma Puja on 16 September 2020
Vishwakarma Baba

Significance of Vishwakarma Puja – विश्वकर्मा पूजा का महत्व

Updated on July 6, 2020

Lord Vishwakarma’s birthday is known as Vishwakarma Puja, Vishwakarma Day, or Vishwakarma Jayanti. This festival has special significance in Hinduism. Lord Vishwakarma is also known as the ‘sculptor of the gods’, the ‘God of architecture’, the ‘first engineer’, the ‘engineer of the gods’, and the ‘god of machines’. That’s why industries, factories and all kinds of machines are worshiped on this day.

According to beliefs, Lord Vishwakarma has created all the capital monuments in ancient times. Even the ‘Swarga Loka’ of Satyuga, ‘Lanka’ of Treta Yuga, Dwarka of Dwapar, and ‘Hastinapur’ of Kalyuga are also created by Vishwakarma. From this, it is believed that it is necessary for men who desire wealth and happiness and prosperity to worship Baba Vishwakarma.

Vishwakarma Day is specially celebrated in offices and factories apart from homes. Those who are associated with engineering, architecture, welding, and machine work especially celebrate this day with great joy and enthusiasm. On the occasion of Vishwakarma Puja, most of the offices are on holiday and many cultural programs are organized. Moreover, people used to worship all the tools, machines including the idol of Lord Vishwakarma, and photographs.

विश्वकर्मा पूजा का महत्व क्या है

भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है। इस पर्व का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है। भगवान विश्‍वकर्मा को ‘देवताओं का शिल्‍पकार’, ‘वास्‍तुशास्‍त्र का देवता’, ‘प्रथम इंजीनियर’, ‘देवताओं का इंजीनियर’ और ‘मशीन का देवता’ भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह के मशीन की पूजा की जाती है।

मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी, सभी को भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया है। यहां तक कि सतयुग का ‘स्वर्ग लोक’, त्रेता युग की ‘लंका’, द्वापर की ‘द्वारिका’ और कलयुग का ‘हस्तिनापुर’ इत्यादि भी विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित है। इसलिए धन-धान्य और सुख-समृद्धि की इच्छा रखने वाले पुरुषों को बाबा विश्वकर्मा की पूजा करना आवश्यक और मंगलदायी है।

विश्‍वकर्मा पूजा घरों के अलावा दफ्तरों और कारखानों में विशेष रूप से मनाया जाता है। जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए हैं, वो लोग खास तौर से इस दिन को बड़े ही उत्‍साह के साथ मनाते हैं। विश्‍वकर्मा पूजा के मौके पर ज्‍यादातर दफ्तरों में छुट्टी होती है और इसके अलावा कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति, व तस्वीरों समेत सभी औजारों, मशीनों और दुकानों की पूजा करने का विधान है।

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