Vishwakarma Puja on 16 September 2020
Vishwakarma Baba

Benefits of Vishwakarma Puja – विश्वकर्मा पूजा के लाभ

Updated on July 6, 2020

Benefits of Vishwakarma Puja

Every year Vishwakarma Puja is celebrated on Kanya Sankranti. It is celebrated on the 16th or 17th September of every year, but in some parts of the country, people celebrate it on the second day of Deepawali. Lord Vishwakarma was born on this day; hence, it is also known as Vishwakarma Jayanti.

Lord Vishwakarma considered the world’s first engineer and architect. Therefore, the industries, factories, and every kind of machine are worshiped on this day. Vishwakarma Puja is performed by all artists, weavers, artisans, and industrial houses. On this day, most of the factories are closed, and people worship Lord Vishwakarma with euphoria.

It is said that in ancient times, as many capitals were made, most of them were made by Lord Vishwakarma. Vishwakarma creates Even the Paradise Lok of Satyuga, Lanka of the Tretayuga, Dwarka of the Tretayuga, and Kalyug’s Hastinapur. It is also said about the creation of Sudamapuri that its creator was Vishwakarma. It implies that it is necessary and beneficial to worship Baba Vishwakarma for men with a desire for wealth and prosperity.

विश्वकर्मा पूजा के लाभ

प्रत्येक वर्ष विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति पर मनाई जाती है। यह हर साल 16 या 17 सितंबर को मनाया जाता है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में, यह दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था; इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है।

विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इसलिए, इस दिन उद्योगों, कारखानों और हर तरह की मशीन की पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा सभी कलाकारों, बुनकरों, कारीगरों और औद्योगिक घरानों द्वारा की जाती है। इस दिन, अधिकांश कारखाने बंद किये जाते हैं, और लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा उत्साह के साथ करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन काल में, जितने राजधानियाँ बनाई गई थीं, उनमें से अधिकांश, भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई थीं। विश्वकर्मा भगवान ने सतयुग के स्वर्ग लोक, त्रेता युग की लंका, द्वापर युग की द्वारका और कलयुग की हस्तिनापुर का निर्माण किया हैं। सुदामापुरी की रचना के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसके निर्माता विश्वकर्मा थे। इन सबका तात्पर्य यह है कि धन और समृद्धि की इच्छा वाले पुरुषों के लिए बाबा विश्वकर्मा की पूजा करना आवश्यक और लाभदायक है।

Copyright © Vishwakarma Puja 2018-2020. All Right Reserved.

In association with www.festivalpuja.com.